भारत ने रोग का पता लगाने और आपातकालीन प्रतिक्रिया के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया: केंद्र
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि केंद्र ने निदान संबंधी बुनियादी ढांचे का विस्तार करके, जीनोमिक निगरानी को बढ़ाकर और केंद्रीय एवं राज्य स्वास्थ्य अधिकारियों के बीच समन्वय को मजबूत करके उभरती संक्रामक बीमारियों का पता लगाने और उनसे निपटने के लिए भारत की तैयारियों को मजबूत किया है।
मंत्रालय ने कहा कि वह राष्ट्रीय कार्यक्रमों और संस्थानों के माध्यम से नियमित रूप से तैयारियों की समीक्षा और उन्हें उन्नत करता है, जिनमें वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरीज (वीआरडीएल) नेटवर्क, जीनोमिक निगरानी पहल और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण रोगजनकों का शीघ्र पता लगाने के लिए अपशिष्ट जल निगरानी शामिल हैं। सिमुलेशन अभ्यास, मॉक ड्रिल और त्वरित प्रकोप प्रतिक्रिया तंत्र के माध्यम से भी तैयारियों को मजबूत किया जाता है।
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) द्वारा कार्यान्वित एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के तहत, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के राष्ट्रीय वायरल अनुसंधान और निदान प्रयोगशालाओं (वीआरडीएल) नेटवर्क का विस्तार करते हुए इसमें 163 प्रयोगशालाएं शामिल की गई हैं, जिनमें 11 क्षेत्रीय वीआरडीएल, 27 राज्य वीआरडीएल और 125 मेडिकल कॉलेज वीआरडीएल शामिल हैं। इस विस्तार का उद्देश्य देश भर में निदान क्षमता को मजबूत करना है।
रोग निगरानी और प्रकोप प्रतिक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए, सरकार ने संक्रामक रोग अनुसंधान और निदान प्रयोगशालाओं के साथ-साथ चार क्षेत्रीय नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग हब स्थापित किए हैं। इन सुविधाओं से विकेंद्रीकृत निदान को बढ़ावा मिलने, रोगजनकों के जीनोमिक लक्षण वर्णन को सक्षम बनाने, डेटा उत्पादन को मानकीकृत करने और प्रभावी जन स्वास्थ्य निगरानी के लिए समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने की उम्मीद है।
मंत्रालय ने कहा कि एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) और एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (आईएचआईपी) के तहत वास्तविक समय में रोग निगरानी और रिपोर्टिंग के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के दौरान केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत किया गया है। नियमित सूचना साझाकरण और समन्वित प्रकोप प्रतिक्रिया तंत्र को भी संस्थागत रूप दिया गया है।
बीमारी के प्रकोप के दौरान, केंद्र सहयोगी जांच, जोखिम आकलन, प्रयोगशाला पुष्टि और आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल के तहत बहुविषयक विशेषज्ञों की तैनाती के माध्यम से तकनीकी सहायता प्रदान करता है। आपातकालीन तैयारियों को बेहतर बनाने के लिए इन समन्वय तंत्रों का परीक्षण सिमुलेशन अभ्यासों और मॉक ड्रिल के माध्यम से भी किया गया है।
देश की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने के दीर्घकालिक प्रयासों के तहत, सरकार ने प्रधानमंत्री-आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-अभिम) की शुरुआत की है। इस मिशन का उद्देश्य प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं और संस्थानों की क्षमता को बढ़ाना है ताकि वे नए और उभरते रोगों की पहचान और प्रबंधन कर सकें।
यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने मंगलवार को राज्यसभा में लिखित जवाब में साझा की।

