डार्क वेब से बदल रहा ड्रग तस्करी का तरीका, जांच एजेंसियों के लिए बढ़ी चुनौती
भारत में नशे के खिलाफ कार्रवाई तेज होने के साथ ही जांच एजेंसियों के सामने एक नई चुनौती सामने आ रही है। अब ड्रग तस्करी से जुड़े नेटवर्क पारंपरिक तरीकों की जगह डार्क वेब और डिजिटल लेन-देन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, नशीले पदार्थों का कारोबार अब पुराने जमीन, समुद्र और हवाई रास्तों से आगे बढ़कर डिजिटल माध्यमों तक पहुंच गया है। इससे तस्करों की पहचान करना और पैसों के लेन-देन का पता लगाना ज्यादा मुश्किल हो गया है।
खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ड्रग नेटवर्क अब डार्क वेब का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके साथ ही डिजिटल करेंसी के जरिए भुगतान किया जा रहा है, जिससे आरोपी अपनी पहचान और नेटवर्क को छिपाने की कोशिश करते हैं।
अधिकारी के अनुसार, किसी भी ड्रग तस्करी मामले में पैसों के रास्ते का पता लगाना बेहद अहम होता है। लेकिन नई तकनीकों के इस्तेमाल ने जांच एजेंसियों के सामने नई परेशानियां खड़ी कर दी हैं।
अधिकारियों का कहना है कि तस्कर ऐसे डिजिटल समूहों की मदद ले रहे हैं, जो सुरक्षित ऑनलाइन माध्यमों और विशेष तकनीकों के जरिए काम करते हैं। ऐसे नेटवर्क तक पहुंचना एजेंसियों के लिए आसान नहीं होता।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने 2020 से 2024 के बीच डार्क वेब और डिजिटल भुगतान से जुड़े 92 मामलों में कार्रवाई की है। एजेंसी अब ऑनलाइन निगरानी और तकनीकी क्षमता को लगातार मजबूत कर रही है।
इस साल की शुरुआत में एनसीबी ने डार्क वेब के जरिए चल रहे एक बड़े ड्रग नेटवर्क का खुलासा किया था। जांच में पता चला कि यह नेटवर्क विदेशों से नशीले पदार्थ मंगाकर देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचा रहा था।
अधिकारियों के मुताबिक, अब छोटे और नए गिरोह भी तेजी से सामने आ रहे हैं। ये बड़े अपराध संगठनों से जुड़े बिना तकनीकी जानकारी के आधार पर अपना नेटवर्क चला रहे हैं।
पहले बड़े ड्रग नेटवर्क का प्रभाव ज्यादा था, लेकिन अब कुछ लोगों के छोटे समूह भी तकनीक का इस्तेमाल कर तस्करी करने की कोशिश कर रहे हैं। इनका कोई पुराना रिकॉर्ड नहीं होने के कारण इनकी पहचान करना और मुश्किल हो जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि बड़े गिरोह अभी भी पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन नए डिजिटल तरीके जांच एजेंसियों के लिए अलग तरह की चुनौती पैदा कर रहे हैं।
बदलते हालात को देखते हुए एजेंसियां अपनी तकनीक, निगरानी और जांच प्रणाली को और मजबूत करने पर काम कर रही हैं।

