डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का विजन आज विकसित भारत की प्रेरणा : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि देश और पश्चिम बंगाल आज अपने महान सपूत, प्रखर राष्ट्रभक्त और भारत की अखंडता के लिए समर्पित युगदृष्टा को श्रद्धापूर्वक नमन कर रहा है। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने जो वैचारिक बीज बोया था, वह आज पूरे देश में फल-फूल रहा है और आधुनिक भारत को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के कारण प्रवास पर हैं, लेकिन तकनीक की मदद से इस ऐतिहासिक कार्यक्रम से जुड़कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रथम की सोच से संकल्प सिद्ध होते हैं
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब वैचारिक शक्ति जमीन से जुड़ी हो, इरादे मजबूत हों, नीयत साफ हो और संपूर्ण समर्पण के साथ कार्य किया जाए, तब संकल्प अवश्य सिद्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन इसी सत्य का उदाहरण है। प्रधानमंत्री ने उनकी 125वीं जन्म जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राष्ट्र प्रथम की भावना से काम करने वाली सरकारें ही राष्ट्रनायकों को उचित सम्मान देती हैं और उनके विजन को आगे बढ़ाती हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार डॉ. मुखर्जी की 125वीं जन्म जयंती को दो वर्ष के राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मना रही है। यह कार्यक्रम 6 जुलाई 2025 से शुरू होकर 6 जुलाई 2027 तक चलेगा। प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल सरकार की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद डॉ. मुखर्जी को समर्पित कार्यक्रमों को नई भव्यता मिली है।
जनसंघ से भाजपा तक विचार की यात्रा
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन एक विचार से जन-आंदोलन तक की प्रेरणादायक यात्रा है। जिस समय भारतीय जनसंघ की स्थापना हुई थी, उस समय कांग्रेस का वर्चस्व था और वैकल्पिक विचारों के लिए कोई स्थान नहीं था। ऐसे कठिन दौर में डॉ. मुखर्जी ने लोकतंत्र में वैचारिक विविधता और राष्ट्रीय चिंतन को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि कोई भी विचार केवल स्थापना से अमर नहीं होता, बल्कि पीढ़ियों के समर्पण से जीवित रहता है। लाखों कार्यकर्ताओं के तप, त्याग और समर्पण ने जनसंघ के उस छोटे से दीपक को बुझने नहीं दिया। आज वही विचार भारतीय जनता पार्टी के रूप में विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक राजनीतिक शक्ति बनकर देश की सेवा कर रहा है।
डॉ. मुखर्जी का विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक
प्रधानमंत्री ने कहा कि समय के साथ कई विचार कमजोर पड़ जाते हैं, लेकिन डॉ. मुखर्जी द्वारा बोया गया वैचारिक बीज आज पहले से अधिक तेजी से विकसित हो रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में जब भाजपा की यात्रा का इतिहास लिखा जाएगा, तब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साहस, दूरदृष्टि और विचारों का विशेष उल्लेख किया जाएगा।
राष्ट्रीय एकता के लिए जीवनभर संघर्ष किया
पीएम मोदी ने संसद में डॉ. मुखर्जी के उस कथन का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय एकता के आधार पर ही सुनहरे भविष्य की नींव रखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में विभाजन के समय पूरे बंगाल को भारत से अलग करने की साजिशों के विरुद्ध डॉ. मुखर्जी चट्टान की तरह खड़े रहे। जनमत तैयार कर और राजनीतिक संघर्ष के माध्यम से उन्होंने सुनिश्चित किया कि पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न हिस्सा बना रहे। प्रधानमंत्री ने डॉ. मुखर्जी के उस प्रसिद्ध कथन का भी उल्लेख किया कि “कांग्रेस ने देश का बंटवारा किया और मैंने पाकिस्तान का बंटवारा कर दिया।”
‘एक देश, एक संविधान’ के लिए सर्वोच्च बलिदान
प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी एक भारत-श्रेष्ठ भारत के लिए पूरी तरह समर्पित थे। उन्होंने ‘दो विधान, दो प्रधान और दो निशान’ का पुरजोर विरोध किया और समान संविधान तथा समान राष्ट्रीय चेतना का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने अपने सिद्धांतों के लिए संघर्ष किया, जेल गए और अंततः कश्मीर के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाकर डॉ. मुखर्जी के सपने को साकार किया और आज पूरे देश में एक संविधान पूरी गरिमा के साथ लागू है।
एक भारत-श्रेष्ठ भारत के विजन को आगे बढ़ाया
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज एक भारत-श्रेष्ठ भारत का विचार डॉ. मुखर्जी की राष्ट्रीय दृष्टि का विस्तार है। ऐसा भारत, जहां उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम के बीच कोई भेदभाव न हो, सभी राज्यों को समान अवसर मिलें और हर नागरिक एक संविधान तथा एक राष्ट्रीय भावना से जुड़ा हो।
भारतीय शिक्षा और मातृभाषा के प्रबल समर्थक थे
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि मात्र 33 वर्ष की आयु में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। उन्होंने शिक्षा को औपनिवेशिक सोच से मुक्त कर भारतीय संस्कृति और मातृभाषा से जोड़ने का प्रयास किया। उनका मानना था कि आत्मविश्वासी भारत के लिए शिक्षा का भारतीय आत्मा से जुड़ा होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से स्थानीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देकर केंद्र सरकार ने डॉ. मुखर्जी के इस सपने को साकार किया है।
औद्योगिक भारत की मजबूत नींव रखी
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग मंत्री के रूप में डॉ. मुखर्जी ने देश के औद्योगिक विकास की मजबूत आधारशिला रखी। चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स, सिंदरी फर्टिलाइजर प्लांट, दामोदर वैली कॉरपोरेशन और इंडस्ट्रियल फाइनेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (आईएफसीआई) जैसी संस्थाएं उनके दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी के लिए उद्योग, विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थान केवल संस्थाएं नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के साधना केंद्र थे। वे ऐसी व्यवस्था चाहते थे जो प्रतिभा को अवसर दे, नवाचार को बढ़ावा दे और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव रखे।
युवाओं से विकसित भारत के निर्माण का आह्वान
पीएम नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह डॉ. मुखर्जी ने एक भारत के लिए अपना जीवन समर्पित किया, उसी प्रकार आज सभी नागरिकों को श्रेष्ठ भारत और विकसित भारत के निर्माण के लिए समर्पित होकर कार्य करना चाहिए। अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने डॉ. मुखर्जी के शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि जो भी कार्य हाथ में लें, उसे पूरी गंभीरता, तन्मयता और निष्ठा के साथ पूरा करें तथा कोई भी काम अधूरा न छोड़ें।

