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देश की प्रतिष्ठा नहीं होगी तो हमें भी नहीं मिलेगा सम्मान: दीपक विस्पुते

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– भारतीय विचार संस्थान न्यास की व्याख्यानमाला में ‘ध्येयनिष्ठ जीवन की दिशा’ पर मंथन

भोपाल, । भारत के नौजवाओं को यह विचार करने की आवश्यकता है कि उनका ध्येय क्या हो? हमारे मन में व्यक्तिगत उन्नति का सपना होना चाहिए, लेकिन अपने देश का निर्माण करने का ध्येय भी होना चाहिए। क्योंकि देश की प्रतिष्ठा नहीं होगी तो हमें भी सम्मान नहीं मिलेगा।

उकत विचार बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक दीपक विस्पुते ने भारतीय विचार संस्थान न्यास की ओर से आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला में व्यक्त किए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आरटेक सोलोनिक्स लिमिटेड के चेयरमैन अमित अनिल राजे एवं न्यास के अध्यक्ष सतीश पिंपलीकर मंच पर उपस्थित रहे।

क्षेत्र प्रचारक विस्पुते ने व्याख्यानमाला के दूसरे दिन ‘ध्येयनिष्ठ जीवन की दिशा’ विषय पर उद्बोधन में कहा कि आज जब दुनिया के बारे में विचार करते हैं तो ध्यान आता है कि जहां दुनिया में जहां की देश बूढ़े हो रहे हैं वहीं भारत युवा हो रहा है। इसलिए माना जा रहा है कि आनेवाला समय भारत का है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने दुनियाभर के युवाओं का आईक्यू का परीक्षण करके बताया कि भारत के युवा का आईक्यू सबसे अधिक है।

उन्होंने कहा, बिल गेट्स जब भारत आए तो उन्होंने पत्रकारों को कहा था कि मैं भारत को धन्यवाद करने आया हूं। मेरी सफलता का श्रेय भारत के युवाओं को है। इसी तरह अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने कहा था कि सिलिकॉन वैली में 50 प्रतिशत से अधिक भारतीय युवा हैं। दुनिया के बड़े संस्थानों में भारत के युवा महत्वपूर्ण दायित्वों पर हैं। सुंदर पिचई से लेकर सत्य नाडेला तक अनेक युवा बड़ी कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं। विभिन्न देशों की सरकार में भारतीय मूल के नागरिक हैं। जिस देश ने वर्षों तक भारत पर शासन किया, उस ब्रिटिश को भी आज भारतीय मूल के युवा को कमान सौंपनी पड़ी है।

विस्पुते ने कहा, दुनिया के शीर्ष अमीर व्यक्तियों में भारत के अनेक लोग शामिल हैं लेकिन एक और तस्वीर है जो चिंता पैदा करती है। भारत की आर्थिक विषमता के बारे में जब हम विचार करते हैं तो ध्यान आता है कि 15 करोड़ से अधिक ऐसे लोग हैं जिन्हें दोनों समय का भोजन नहीं मिल पाता है। भारत के युवा को इस स्थिति पर विचार करना चाहिए। जिस देश ने दुनिया को सिखाया आज उस देश में साक्षरता का सरकारी आंकड़ा भी देखें तो 73 प्रतिशत से अधिक नहीं है। इसमें भी ऐसे लोग अधिक हैं जो सिर्फ अपने हस्ताक्षर करना जानते हैं। 27 करोड़ नागरिक ऐसे हैं, जिनके लिए काला अक्षर भैंस बराबर है। क्या यह स्थिति हमारी चिंता नहीं बढ़ाती है। इस स्थिति को बदलने के बारे में हम कुछ विचार करते हैं या नहीं? दुनिया में सबसे अधिक भिक्षुक, अंधेपन के शिकार, टीबी के रोगी भी भारत में सबसे अधिक हैं। सड़क दुर्घटना में मरने वाले लोग भी भारत में सबसे अधिक है। भारत के यह दृश्य हमें चुभने चाहिए ताकि इनके समाधान की राह निकालें।

उन्होंने कहा, जो लोग अपने समाज की गाढ़ी कमाई से शिक्षित होकर, समाज के उत्थान के लिए कुछ नहीं करते हैं, उनके लिए स्वामी विवेकानंद ने बहुत कठोर शब्दों का उपयोग किया है। आज के युवा का लक्ष्य व्यक्तिगत प्रगति है। उसके पास ऐसी जेबें हैं, जो कभी भरती ही नहीं हैं। जापान के युवाओं को जब अपना लक्ष्य लिखने को कहा तो सबने एक ही लक्ष्य लिखा–अपने देश की सेवा करना। भारत के युवाओं का भी यही लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने स्वामी विवेकानंद, नारायण गुरु, राम तीर्थ, ज्योतिबा फुले, सावित्री देवी फुले, महात्मा गांधी, रविन्द्र नाथ ठाकुर, बाबू गेनू सहित कई महान लोगों के योगदान का उल्लेख किया और व्याख्यानमाला में उपस्थित युवाओं से उनके जीवन का अनुसरण करने का आग्रह किया।

युवाओं को परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि जो असंभव लगने वाले सपने देखता है, वही युवा है। जो युवा अगर उद्देश्य और लक्ष्य को लेकर नहीं चलता तो वह उस नाव की तरह है जो बिना नाविक के समुद्र में पड़ी है। उन्होंने कहा कि आगामी 25 वर्षों तक भारत के युवाओं को देश के निर्माण में योगदान करने का ध्येय लेकर चलना चाहिए।

अमित अनिल राजे ने कहा कि प्रत्येक युवा को अपना लक्ष्य बनाना चाहिए और उसको प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयत्न करने चाहिए। अपना काम प्रारंभ करने से पूर्व जब मैंने पश्चिम के विद्वानों को पढ़ा तो बहुत उलझने उत्पन्न खड़ी हो गईं। तब चाणक्य के विचारों से मुझे मार्ग दिखाया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा वर्ग एवं शहर के गणमान्य नागरिक बंधु उपस्थित रहे।

व्याख्यानमाला के अंतिम दिन मातृशक्ति के लिए होगा व्याख्यान

तीन दिवसीय व्याख्यानमाला के अंतिम दिन गुरुवार को मातृशक्ति के लिए व्याख्यान रहेगा। इसमें ‘मातृशक्ति: कल आज और कल’ विषय पर मुख्य वक्ता सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मोनिका अरोरा का व्याख्यान होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता सैम ग्लोबल विश्वविद्यालय की कुलाधिपति प्रीति सलूजा करेंगी। व्याख्यान सायं 5:30 बजे रविंद्र भवन में आयोजित होगा।