इतिहास के पन्नों मैं 31 मईः साम्राज्ञी जिन्होंने सुशासन की राह दिखा लोकमाता कहलाईं
अहिल्याबाई होलकर मराठा साम्राज्य की सुुप्रसिद्ध महारानी थीं जिन्होंने माहेश्वर को राजधानी बनाकर शासन किया और उन्हें लोकमाता के रूप में याद किया जाता है । अहिल्याबाई ने अपने राज्य की सीमाओं के बाहर देशभर के प्रसिद्ध तीर्थों और स्थानों में मन्दिर बनवाए, घाट बँधवाए, कुओं और बावड़ियों का निर्माण किया, मार्ग बनवाए, भूखों के लिए अन्न क्षेत्र और प्याऊ खोले, मन्दिरों में शास्त्रों के मनन-चिन्तन और प्रवचन के लिए विद्वानों की नियुक्ति की। उनके मुख्य योगदानों में से एक 12 ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ मंदिर और बनारस का काशी विश्वनाथ मंंदिर, जिसका जिर्णोद्धार महारानी अहिल्याबाई होलकर ने करवाया। साथ ही महिलाओं को शिक्षा का अधिकार दिलाया और महिला सशक्तिकरण के लिए जीवन पर्यंत प्रयत्न किया।
अहिल्याबाई होलकर का जन्म मराठा हिन्दू परिवार में महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के चौंडी नामक गाँव में हुआ था। दस-बारह वर्ष की आयु में उनका विवाह हुआ और उनतीस वर्ष की अवस्था में विधवा हो गईं। 13 अगस्त सन् 1795 को उनकी जीवन-लीला समाप्त हो गई।
भारत में अहिल्याबाई होलकर का नाम बहुत ही सम्मान के साथ लिया जाता है। इनके बारे में अलग अलग राज्यों की पाठ्य पुस्तकों में अध्याय मौजूद हैं।अहिल्याबाई होलकर एक ऐसी महारानी के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने भारत के अलग-अलग राज्यों में मानवता की भलाई के लिये अनेक कार्य किये। भारत सरकार तथा विभिन्न राज्यों की सरकारों ने उनकी प्रतिमाएँ बनवायी हैं और उनके नाम से कई कल्याणकारी योजनाओं भी चलाया जा रहा है।

