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केंद्र सरकार ने तेल विपणन कंपनियों से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर 30 दिनों के एलपीजी भंडार बनाने को कहा है।

30 मई । सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों से कम से कम 30 दिनों के लिए पर्याप्त द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) भंडार बनाने को कहा है क्योंकि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो रही है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर आयोजित अंतर-मंत्रालयी प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कल पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही। आपूर्ति में अचानक आई बाधाओं से बचाव के लिए एहतियाती उपायों की रूपरेखा बताते हुए सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत कच्चे तेल के भंडारण की क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार रणनीतिक भंडारों के माध्यम से ईंधन सुरक्षा को मजबूत कर रही है और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है, साथ ही जमाखोरी पर अंकुश लगाने के प्रयास जारी रखे हुए है। सरकार ने सरकारी तेल विपणन कंपनियों – इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) – को अपने नियमित वाणिज्यिक भंडारों के अतिरिक्त भंडारण की योजना तैयार करने को कहा है।

श्रीमती शर्मा ने कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का पर्याप्त भंडार है। उन्होंने आगे कहा कि रिफाइनरियां इष्टतम स्तर पर काम कर रही हैं और एलपीजी उत्पादन लगभग 92,000 मीट्रिक टन प्रति दिन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी एलपीजी वितरक केंद्र में आपूर्ति की कमी की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।

पिछले चार दिनों में ही 1.78 करोड़ एलपीजी रिफिल बुकिंग प्राप्त हुईं और लगभग 1.8 करोड़ सिलेंडर वितरित किए गए, जिनमें से 96 प्रतिशत डिलीवरी डिजिटल रूप से प्रमाणित हुईं। प्रवर्तन एजेंसियों और तेल विपणन कंपनियों ने निरीक्षण तेज कर दिए हैं, जिसके परिणामस्वरूप ईंधन की ज़ब्ती, एफआईआर, गिरफ्तारियां और अनियमित डीलरों और वितरकों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति मजबूत बनी हुई है, जबकि औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति 99 प्रतिशत तक बहाल कर दी गई है।

विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम महाजन ने कहा कि सरकार खाड़ी और पश्चिम एशिया क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रही है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में स्थित भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास भारतीय नागरिकों को समय पर सहायता प्रदान करने के लिए चौबीसों घंटे हेल्पलाइन सेवा प्रदान कर रहे हैं। श्री महाजन ने आगे कहा कि समग्र उड़ान स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है और इस क्षेत्र से भारत भर के विभिन्न गंतव्यों के लिए अतिरिक्त उड़ानें संचालित हो रही हैं।

बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने कहा कि मंत्रालय नाविकों के कल्याण और निर्बाध समुद्री संचालन सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों और समुद्री हितधारकों के साथ समन्वय कर रहा है। उन्होंने बताया कि कच्चे तेल का टैंकर, व्यापारिक पोत निसोस केरोस, होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजर चुका है और 3 जून को विशाखापत्तनम पहुंचने की उम्मीद है। पोत लगभग 2.7 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का परिवहन कर रहा है।

श्री शर्मा ने आगे कहा कि इस क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और भारतीय ध्वज वाले या विदेशी ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों पर भारतीय नाविकों से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई है।