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रोजगार, व्यापार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे प्रयासों से हिंदी की स्वीकार्यता बढ़ रही है: जितेंद्र सिंह

21 मई। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार को नई दिल्ली में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) द्वारा आयोजित हिंदी सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि रोजगार, व्यापार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और आधिकारिक संचार में हिंदी के उपयोग के विस्तार के साथ-साथ इसे विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक स्वीकृति मिल रही है।

“कोई भाषा रोजगार और व्यावसायिक हितों से जुड़ने पर तेजी से विकसित होती है,” सिंह ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा, जिसका मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रशासन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सार्वजनिक संचार में हिंदी के उपयोग का विस्तार करना था।

उन्होंने आगे कहा कि हिंदी “किसी पर थोपी नहीं जा रही है” बल्कि इसे “सरकारी काम, रोजगार, व्यापार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक भागीदारी” से जोड़कर बढ़ावा दिया जा रहा है।

सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के तहत पिछले एक दशक में हिंदी के उपयोग में आए “महत्वपूर्ण सकारात्मक परिवर्तन” पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी सीखने में रुचि गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी बढ़ी है।

रोजगार के बदलते रुझानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के कई युवा स्वेच्छा से हिंदी सीख रहे हैं क्योंकि बहुराष्ट्रीय कंपनियां हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में निपुण उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि दक्षिण भारत के कई कर्मचारी अब “अत्यंत परिष्कृत और प्रभावी हिंदी” का प्रयोग कर रहे हैं, जो देश में भाषाई परिदृश्य में हो रहे बदलाव को दर्शाता है।

भारत के डिजिटल परिवर्तन से पढ़ने की आदतों में आए बदलावों को जोड़ते हुए सिंह ने कहा कि डिजिटल युग में पढ़ने की संस्कृति “लुप्त नहीं हुई है” बल्कि मोबाइल फोन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित हो गई है। उन्होंने संस्थानों से आग्रह किया कि वे वैज्ञानिक साहित्य, शोध सामग्री, सरकारी पहल और मंत्रालय की उपलब्धियों को हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में डिजिटल रूप से उपलब्ध कराएं।

वैज्ञानिक ज्ञान तक व्यापक जनपहुँच की मांग करते हुए, सिंह ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित सामग्री को “सरल और व्यावहारिक हिंदी” में संप्रेषित करने के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं।

चिकित्सा और इंजीनियरिंग शिक्षा में भारतीय भाषाओं के बढ़ते उपयोग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मातृभाषा में ज्ञान प्रदान करने से सीखना “अधिक सुलभ और प्रभावी” हो जाता है, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद करने के लिए कुछ तकनीकी शब्दों को उनके अंतरराष्ट्रीय स्वरूप में ही जारी रखना चाहिए।

बैठक में हिंदी के कार्यान्वयन, वैज्ञानिक लेखन, डिजिटल हिंदी सामग्री और अन्य राजभाषा संबंधी पहलों में मंत्रालय की प्रगति की समीक्षा भी की गई। समिति के सदस्यों ने वैज्ञानिक पत्रिकाओं और शोध पत्रों के व्यापक हिंदी अनुवाद, सोशल मीडिया और इन्फोग्राफिक्स के माध्यम से हिंदी प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने और आम जनता के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान को सरल बनाने के उद्देश्य से नियमित कार्यशालाओं के आयोजन का प्रस्ताव रखा।

सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि हिंदी को बढ़ावा देने से “स्वैच्छिक भागीदारी और व्यावहारिक उपयोग” को प्रोत्साहन मिलना चाहिए, साथ ही भारत के वैज्ञानिक, शैक्षिक और प्रशासनिक तंत्र में इसकी भूमिका को मजबूत करना चाहिए।