अमेरिका ने ईरान की 14 सूत्री योजना के प्रमुख तत्वों को खारिज कर दिया है, जबकि नाजुक युद्धविराम के बावजूद इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष तेज हो गया है।
अमेरिका और ईरान के बीच सुलह की राह अभी भी अनिश्चित दिख रही है, क्योंकि वाशिंगटन तेहरान द्वारा प्रस्तावित युद्धविराम योजना के प्रमुख बिंदुओं का विरोध कर रहा है। पश्चिम एशिया में नाजुक युद्धविराम पर दबाव बना हुआ है। ईरान के सरकारी प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि अमेरिका ने युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से तेहरान की 14 सूत्री योजना पर प्रतिक्रिया दी है, लेकिन फिलहाल इसकी समीक्षा की जा रही है। इजरायली मीडिया से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने प्रस्ताव की जांच की है और इसे “अस्वीकार्य” बताया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने “अभी तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है”, जो अप्रत्यक्ष और मध्यस्थता वाली वार्ता के बीच वाशिंगटन के कड़े रुख का संकेत है।
ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि उसे अपने 14 सूत्री प्रस्ताव पर अमेरिका की प्रतिक्रिया मिल गई है और वह वर्तमान में इसकी समीक्षा कर रहा है। तेहरान के अधिकारियों का कहना है कि योजना का मुख्य उद्देश्य शत्रुता को समाप्त करना है और इसमें परमाणु मुद्दों का कोई ज़िक्र नहीं है, यही वह अंतर है जो दोनों पक्षों को विभाजित करता रहता है। इस समय कोई सक्रिय परमाणु वार्ता नहीं चल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रस्ताव पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा है कि यह अमेरिका की मुख्य मांगों, विशेष रूप से परमाणु प्रतिबंधों से संबंधित मांगों को पूरा नहीं करता है।
दक्षिणी लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष युद्धविराम के बावजूद तेज हो गया है, और दोनों पक्षों की ओर से बार-बार उल्लंघन की खबरें आ रही हैं। इजरायली सेना ने हवाई हमले तेज कर दिए हैं और हाल के दिनों में हिजबुल्लाह से जुड़े दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया है। साथ ही, अभियान का दायरा बढ़ाते हुए दक्षिणी इलाकों के कुछ हिस्सों में नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी भी जारी की गई है।
इस बीच, हिज़्बुल्लाह लगातार इजरायली सैनिकों पर रॉकेट और ड्रोन हमले कर रहा है, जिनमें फाइबर-ऑप्टिक गाइडेड ड्रोन का इस्तेमाल भी शामिल है, जिन्हें पता लगाना मुश्किल है। इससे सीमा पर तनाव बना हुआ है। दोनों पक्षों की सैन्य तैयारियां चरम पर हैं और इजरायल आगे तनाव बढ़ने की आशंका के मद्देनजर आकस्मिक योजनाओं को बनाए हुए है। मध्यस्थों के माध्यम से राजनयिक प्रयास जारी हैं, लेकिन वाशिंगटन और तेहरान के बीच गहरा अविश्वास किसी भी सार्थक प्रगति में बाधा डाल रहा है।

