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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को जनता के विश्वास की रक्षा करनी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आज कहा कि न्यायपालिका और उससे संबद्ध संस्थाओं को जनता का गहरा विश्वास प्राप्त है और इस विश्वास को बनाए रखना और इसे और मजबूत करना सभी हितधारकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। वे जयपुर के संविधान क्लब में “सेवानिवृत्ति के बाद न्यायपालिका की भूमिका” विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। पूर्व न्यायाधीशों की भूमिका पर जोर देते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि न्याय व्यवस्था को मजबूत करने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नागरिकों में कानूनी जागरूकता फैलाने के अलावा, सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुलह और मध्यस्थता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने न्यायपालिका और उससे संबद्ध निकायों, जिनमें राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण और राज्य विधि सेवा प्राधिकरण शामिल हैं, से अधिक सक्रियता और जागरूकता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

सभा को संबोधित करते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों ने कई ऐतिहासिक फैसले दिए हैं जिनका लाखों लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अदालतों में मुकदमा दायर करने से पहले मध्यस्थता केंद्रों या लोक अदालतों से संपर्क करने पर विचार करें। इस अवसर पर राजस्थान उच्च न्यायालय की पहल, यूनिफॉर्म रजिस्ट्रेशन नंबर सिस्टम (यूनिफॉर्म रजिस्ट्रेशन नंबर सिस्टम) का शुभारंभ किया गया। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों द्वारा लिखित लेखों का संकलन भी जारी किया गया। इस कार्यक्रम में राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, सेवानिवृत्त न्यायाधीश संघ के सदस्य और कई न्यायाधीश एवं न्यायिक अधिकारी उपस्थित थे।