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पश्चिम बंगाल : पहले चरण के मतदान में जमकर हुई हिंसा, निष्पक्ष मतदान पर उठे सवाल

कोलकाता, 23 अप्रैल । पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान गुरुवार को 16 जिलों की 152 सीटों पर सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हुआ। कई संवेदनशील इलाकों में हिंसा, बूथों पर तनाव, ईवीएम में खराबी और सुरक्षा बलों के खिलाफ शिकायतों काे लेकर माहौल तनावपूर्ण बना रहा। विपक्षी दलों ने निष्पक्ष मतदान पर सवाल उठाए हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल ने आरोपों को राजनीतिक बताया है।

सबसे गंभीर घटनां दक्षिण दिनाजपुर जिले के कुमारगंज विधानसभा क्षेत्र का मामला शामिल रहा। यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशी शुभेंदु सरकार ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला कर मारपीट की। बताया कि वह मतदान केंद्रों का दौरा कर रहे थे, तभी कहासुनी के बाद कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और धक्का-मुक्की शुरू कर दी। घटना का वीडियो भी सामने आया, जिसमें भीड़ उन्हें घेरकर हमला करती दिखाई दे रही है। इस दाैरान उनके साथ मौजूद सुरक्षाकर्मी उन्हें बचाने की कोशिश करता नजर आया। शुभेंदु सरकार ने आरोप लगाया कि उनके मतदान एजेंटों को कई बूथों से बाहर निकाला गया था और जब वह बूथ संख्या 24 पहुंचे, तभी उन पर हमला हुआ।

बीरभूम जिले के लाभपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के पोलिंग एजेंट पर हमला किए जाने का आरोप लगा। विश्वजीत मंडल नामक कार्यकर्ता के सिर पर गंभीर चोट आई और उनका सिर फट गया। घटना के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया। वहीं जिले के दुबराजपुर विधानसभा क्षेत्र के खैराशोल इलाके में मतदान के अंतिम चरण में फिर तनाव भड़क गया। आरोप है कि मतदान मशीन में खराबी के कारण लगभग आधे घंटे तक मतदान रुका, जिसके बाद मतदाता आक्रोशित हो गए। केंद्रीय बलों और लोगों के बीच तीखी बहस हुई। हालात इतने बिगड़े कि सुरक्षा बलों पर पथराव की कोशिश हुई, एक पुलिस वाहन में तोड़फोड़ की गई और कुछ जवान घायल हो गए। पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए कड़ा रुख अपनाना पड़ा। इसका एक वीडियो सामने आया है जिसमें पुलिस अधिकारी बंदूक निकाल कर उपद्रवियों की ओर तानते नजर आ रहे हैं।

मुर्शिदाबाद जिले के नाओदा में सुबह से कई बार तनाव की स्थिति बनी रही। हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के समर्थक आमने-सामने आ गए। आरोप है कि हुमांयू के काफिले पर हमला किया गया, उनके वाहन में तोड़फोड़ की गई और रास्ता रोकने की कोशिश की गई। बाद में केंद्रीय सुरक्षा बलों ने हस्तक्षेप कर हालात काे संभाला। इसी मामले में तीन लोगों को हिरासत में लिए जाने की सूचना है। जिले के जालंगी विधानसभा क्षेत्र के महिषमारी इलाके के 101 नंबर बूथ पर मतदान मशीन खराब होने से मतदान काफी देर तक बाधित रहा।

पश्चिम मेदिनीपुर जिले से भी कई शिकायतें सामने आईं। नारायणगढ़ क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्रीय सुरक्षा बल पार्टी कार्यालय में घुस आए और कार्यकर्ताओं के साथ धक्का-मुक्की की, जिसमें तीन लोगों के घायल होने का दावा किया गया। सबंग क्षेत्र में भी एक तृणमूल कार्यकर्ता को बिना कारण पीटे जाने का आरोप लगाया गया। पार्टी प्रत्याशी मानस भुइयां ने दावा किया कि संबंधित व्यक्ति मतदान करने जा रहा था, तभी उसे रोका गया और मारा गया।
इसी जिले के केशपुर क्षेत्र से एक दुखद घटना सामने आई। सरिषाखोला क्षेत्र के 225 नंबर बूथ पर मतदान करने पहुंचीं एक बुजुर्ग महिला वोट डालने के बाद अचानक बीमार हो गईं। उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता दी गई, लेकिन बाद में उनकी मृत्यु हो गई।
कूचबिहार जिले के माथाभांगा में भाजपा ने आरोप लगाया कि तृणमूल उम्मीदवार मतदान केंद्र के 50 मीटर दायरे में बैठकर मतदाताओं को प्रभावित कर रहे थे। पैसे बांटने और मतदाताओं को सुविधा देने के आरोप भी लगाए गए। इसको लेकर दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई, जो बाद में नारेबाजी और टकराव में बदल गई।
आसनसोल दक्षिण से भाजपा प्रत्याशी अग्निमित्रा पाल की गाड़ी पर हमला किए जाने का आरोप भी सामने आया। बताया गया कि हीरापुर थाना क्षेत्र में उनकी गाड़ी के पीछे का शीशा तोड़ दिया गया। भाजपा ने इस मामले में थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
सिलीगुड़ी के एक मतदान केंद्र पर एक युवती ने आरोप लगाया कि जब वह वोट डालने पहुंची तो उसे मालूम चला कि उसका वोट पहले ही पड़ चुका है। घटना के बाद उसने शिकायत दर्ज कराई। भाजपा उम्मीदवार ने निगरानी फुटेज की जांच की मांग की।

हल्दिया क्षेत्र से भी केंद्रीय बलों के व्यवहार को लेकर शिकायतें सामने आईं। आरोप लगाया गया कि कुछ स्थानों पर सुरक्षा कर्मियों ने मतदाताओं के साथ सख्ती की, जिससे लोग असहज महसूस कर रहे थे।

दिनभर की इन घटनाओं के बीच प्रशासन ने मतदान प्रक्रिया को कुल मिलाकर नियंत्रित और व्यवस्थित बताया, लेकिन राज्य भर से आई हिंसा, हमलों, मशीन खराबी और राजनीतिक टकराव की घटनाओं ने पहले चरण के मतदान को विवादों में ला दिया। विपक्षी दलों ने निष्पक्ष मतदान पर सवाल उठाए हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल ने आरोपों को राजनीतिक बताया है। चुनाव आयोग ने बताया है कि सभी घटनाओं में रिपोर्ट तलब की गई है और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।