भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष श्रीलंका से वापस भारत रवाना, 10 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
नई दिल्ली, 11 फ़रवरी । भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष श्रीलंका में ऐतिहासिक प्रदर्शनी के बाद भारत के लिए रवाना किए गए। कोलंबो स्थित प्रतिष्ठित गंगारामाया मंदिर में एक सप्ताह तक चले इस सार्वजनिक प्रदर्शन में देशभर से श्रद्धालु पहुंचे थे।
केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय ने बताया कि यह पहली बार है जब पवित्र अवशेषों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शनी के लिए ले जाया गया। इन्हें भारत वापस लाने के लिए उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल श्रीलंका गया, जिसका नेतृत्व मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल और अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चोवना मेन ने किया। उनके साथ वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु और अधिकारी भी मौजूद रहे। अवशेषों का औपचारिक प्रस्थान समारोह बंडारानायके अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुआ, जिसमें श्रीलंका के मंत्री और भारत के उच्चायुक्त भी मौजूद रहे।
सात दिनों तक चले इस प्रदर्शन में श्रीलंका के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने अवशेषों के दर्शन किए। अनुमानित रूप से 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने इस दौरान श्रद्धांजलि दी। श्रीलंका के प्रधानमंत्री, कैबिनेट मंत्री, सांसद, पूर्व राष्ट्रपति और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी अवशेषों को नमन किया।
इस प्रदर्शनी का उद्घाटन श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने किया था। श्रीलंका के नेतृत्व ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत की जनता का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने इस ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन को संभव बनाया। भारतीय पक्ष से उद्घाटन समारोह में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी शामिल हुए थे।
यह ऐतिहासिक प्रदर्शनी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अप्रैल 2025 में श्रीलंका की राजकीय यात्रा के दौरान घोषित की गई थी। इस आयोजन ने भारत और श्रीलंका के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक और सभ्यतागत संबंधों को और मजबूत किया है। साथ ही यह भारत की भूमिका को वैश्विक बौद्ध विरासत के संरक्षक के रूप में पुनः स्थापित करता है।

