वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला ‘सुपर कंगारु’
वैज्ञानिकों ने ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले एक विशाल, प्राचीन कंगारू के बारे में एक बड़ी खोज की है। यह कंगारू लगभग 50,000 साल पहले मौजूद था। पहले, वैज्ञानिकों का मानना था कि ये प्राचीन कंगारू अपने भारी वज़न के कारण कूद नहीं सकते थे। उन्हें लगता था कि वे सिर्फ़ चल सकते थे। नई रिपोर्ट के अनुसार, ये विशाल जीव आधुनिक कंगारुओं की तरह कूद भी सकते थे, हालांकि वे शायद लंबी छलांग के बजाय छोटी-छोटी छलांग लगाते थे। यह जानवर प्लीस्टोसीन युग का है और आज के कंगारुओं की तुलना में काफी बड़ा और भारी था।
पिछली रिपोर्टों में क्या कहा गया था? पहले के शोध से पता चला था कि जो कंगारू बहुत भारी होते हैं, जिनका वज़न लगभग 160 किलोग्राम से ज़्यादा होता है, वे कूद नहीं सकते। वैज्ञानिकों का मानना था कि अगर इतना भारी जानवर कूदने की कोशिश करता, तो उसके पैरों या टखनों की हड्डियां टूट जातीं। ये प्राचीन कंगारू आज के कंगारुओं से बहुत बड़े थे, इसलिए वैज्ञानिक सालों से इस बात पर बहस कर रहे थे कि वे कैसे चलते थे। आज के बड़े कंगारुओं का वज़न लगभग 90 किलोग्राम होता है और वे बहुत ऊँचा कूदने की अपनी क्षमता के लिए जाने जाते हैं। जिस प्राचीन कंगारू (P. goliah) की बात हो रही है, उसका वज़न 250 किलोग्राम तक था। इसका मतलब है कि यह आज के कंगारुओं से दोगुने से भी ज़्यादा भारी था। वैज्ञानिकों का कहना है कि हमें यह नहीं मान लेना चाहिए कि प्राचीन कंगारू बिल्कुल आधुनिक कंगारुओं जैसे दिखते थे।
वैज्ञानिकों ने शोध कैसे किया? वैज्ञानिकों ने 94 आधुनिक कंगारुओं और 40 प्राचीन कंगारुओं के जीवाश्मों और हड्डियों की सावधानी से जांच की। शोध में खास तौर पर कंगारू के पैर की चौथी मेटाटार्सल हड्डी की लंबाई और मोटाई को मापा गया। यह वह हड्डी है जो कूदने के दौरान सबसे ज़्यादा वज़न और दबाव झेलती है। वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि ये हड्डियां 250 किलोग्राम के कंगारू का वज़न सह सकती हैं। शोध से साबित हुआ कि इन विशाल कंगारुओं की पैरों की हड्डियां इतनी मज़बूत थीं कि वे अपने भारी वज़न का दबाव आसानी से झेल सकती थीं। कूदने पर उनकी हड्डियां नहीं टूटती थीं। उनकी एड़ी की हड्डियां काफी बड़ी थीं, जो उनके पैरों की नसों को इतना सहारा देती थीं कि वे बिना किसी दिक्कत के कूद सकते थे। यह प्रजाति लगभग 50,000 साल पहले विलुप्त हो गई थी।

