भारत की अर्थव्यवस्था को घरेलू मांग से मिलेगा सहारा, बैंक कर्ज में तेजी के संकेत
वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि का मुख्य आधार घरेलू खपत और कर्ज रहने की संभावना है। इस दौरान देश की वास्तविक (रियल) जीडीपी वृद्धि दर लगभग 7.2% रहने का अनुमान है, जबकि नॉमिनल जीडीपी में करीब 11% की बढ़ोतरी हो सकती है। यह जानकारी मंगलवार को जारी एसबीआई म्यूचुअल फंड की एक रिपोर्ट में दी गई है।
वित्त वर्ष 2025-26 में कुल कर्ज वृद्धि 10.5 से 11% के बीच रहने का अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में बैंक कर्ज की वृद्धि 13 से 14% तक रह सकती है। बैंक कर्ज वृद्धि दर मई में 9% थी, जो नवंबर 2025 तक बढ़कर 11.4% हो चुकी है। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में कुल कर्ज वृद्धि 10.5 से 11% के बीच रहने का अनुमान जताया गया है।
जिन क्षेत्रों में कर्ज आधारित मांग और बेहतर उत्पादों की मांग है, वहां अच्छा प्रदर्शन देखने को मिल सकता है
एसबीआई म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में घरेलू परिवारों का कर्ज कंपनियों के कर्ज की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ सकता है। जिन क्षेत्रों में कर्ज आधारित मांग और बेहतर उत्पादों की मांग है, वहां अच्छा प्रदर्शन देखने को मिल सकता है।
रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक आर्थिक वृद्धि लगभग 7.5% रही
रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक आर्थिक वृद्धि लगभग 7.5% रही। हालांकि निर्यात अब भी अर्थव्यवस्था की सबसे कमजोर कड़ी बना हुआ है, लेकिन राहत की बात यह है कि महंगाई नियंत्रण में बनी हुई है।
शेयर बाजार में वर्ष 2025 का रुझान 2026 में भी जारी रह सकता है
म्यूचुअल फंड हाउस का मानना है कि शेयर बाजार में वर्ष 2025 का रुझान 2026 में भी जारी रह सकता है। उभरते बाजारों के शेयर और औद्योगिक वस्तुएं बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं, क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीतियों में बड़े बदलाव की संभावना कम
फंड हाउस ने बिजली, गैस परिवहन, पूंजीगत वस्तुएं, सीमेंट और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को निवेश के लिहाज से आकर्षक बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई करीब 4% रह सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीतियों में बड़े बदलाव की संभावना कम जताई गई है।
सरकारी बॉन्ड की आपूर्ति बढ़कर 29 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है
इसके अलावा, सरकारी बॉन्ड की आपूर्ति बढ़कर 29 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। वहीं, रुपए में गिरावट की रफ्तार धीमी रह सकती है और वित्त वर्ष 2027 में यह करीब 2% कमजोर होकर 92 रुपए प्रति अमेरिकी डॉलर के आसपास रह सकता है।
टैरिफ के बावजूद वैश्विक आर्थिक स्थिति मजबूत
रिपोर्ट में कहा गया है कि टैरिफ के बावजूद वैश्विक आर्थिक स्थिति फिलहाल मजबूत बनी हुई है। अमेरिका में एआई से जुड़े निवेश और ढीली सरकारी नीतियों से आर्थिक विकास को समर्थन मिल रहा है। वहीं, यूरोप में सरकारी खर्च बढ़ा है, जबकि चीन अब भी निर्यात पर निर्भर बना हुआ है।

