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धरती पर जीवन की सबसे पुरानी झलक: वैज्ञानिकों की रोमांचक खोज

धरती पर जीवन कैसे पैदा हुआ और शुरुआती जीव वास्तव में कैसे दिखते थे, यह सवाल लंबे समय से वैज्ञानिकों को उलझाता आया है। समस्या यह रही है कि अरबों साल पुरानी चट्टानों में न तो जीवों के अवशेष बच पाते हैं और न ही उनके शरीर के मॉलिक्यूल, क्योंकि समय, गर्मी और दबाव उन्हें पूरी तरह नष्ट कर देते हैं। लेकिन इस बार शोधकर्ताओं ने ऐसी खोज की है जिसने धरती पर जीवन की शुरुआत की कहानी को नई दिशा दे दी है। वैज्ञानिकों ने 3.51 अरब साल पुरानी चट्टानों में ऐसे केमिकल सिग्नेचर खोजे हैं जो उस समय बेहद छोटे और शुरुआती जीवों की मौजूदगी का संकेत देते हैं। इसके अलावा, 2.52 अरब साल पुरानी चट्टानों में ऐसे प्रमाण मिले हैं जो बताते हैं कि रोशनी से ऊर्जा बनाने वाले जीव उस समय तक धरती पर विकसित हो चुके थे।

इस शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से 400 से ज़्यादा पुरानी और नई चट्टानों के नमूने इकट्ठा किए और उनमें मौजूद सूक्ष्म केमिकल कणों का अध्ययन किया। इन नमूनों में पाया गया कि भारत के सिंगभूम क्रेटन की 3.51 अरब वर्ष पुरानी चट्टानों में ऐसे तत्व मौजूद हैं जो उस जमाने में जीवन की उपस्थिति का स्पष्ट संकेत देते हैं। इसी तरह दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया की प्राचीन चट्टानों में भी शुरुआती जीवन के निशान मिले हैं। दक्षिण अफ्रीका की 2.52 अरब वर्ष पुरानी चट्टानों में ऐसे जीवों का संकेत मिला जो सूरज की रोशनी का उपयोग करके ऊर्जा बना सकते थे—यह वही क्षमता है जिसने आगे चलकर पेड़-पौधों, ऑक्सीजन उत्पादन और जीवन-समर्थक वातावरण की नींव रखी।

यह चट्टानें लाखों-करोड़ों साल धरती के भीतर दबकर गर्मी और दबाव का सामना करती रहीं, जिससे इनके भीतर के जैविक अणु काफी हद तक टूट गए। इसके बावजूद, कुछ रासायनिक निशान इतने अच्छे से सुरक्षित रह गए कि वैज्ञानिक अब बहुत पुराने जीवन की उपस्थिति और विकास को बेहतर ढंग से समझ पा रहे हैं। पहले वैज्ञानिक मुख्यतः जीवाश्मों, कार्बन संकेतों या पत्थरों के ढांचे के आधार पर केवल अनुमान लगा पाते थे कि जीवन कब और कहाँ शुरू हुआ होगा। लेकिन यह नई खोज दिखाती है कि धरती पर जीवन का इतिहास पहले सोची गई टाइमलाइन से कहीं ज़्यादा पुराना और जटिल हो सकता है। रोशनी से ऊर्जा बनाने वाले जीव भी शायद हमारी अपेक्षा से बहुत पहले विकसित हो चुके थे, और इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि धरती का वातावरण कैसे बदलता गया, ऑक्सीजन कब बढ़ी, और किस तरह हमारी पृथ्वी धीरे-धीरे जीवन के लिए उपयुक्त बनती गई।