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ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवाद के खिलाफ भारत को मिला मजबूत अंतरराष्ट्रीय समर्थन

ऑपरेशन सिंदूर शुरू करने के बाद आतंकवाद से निपटने के लिए भारत के दृष्टिकोण को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मजबूत समर्थन मिला है। अमेरिका, ब्रिटेन, इजरायल, सऊदी अरब, कतर और यूएई समेत कई देशों ने भारत के रुख का समर्थन किया है।

यूरोपीय संघ और सभी 27 सदस्य देशों ने एक एकीकृत और मजबूत बयान जारी किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ एकजुटता व्यक्त की, आतंकवाद से लड़ने के अपने संप्रभु अधिकार की पुष्टि की, साथ ही संयम बरतने और कूटनीतिक तरीके से आगे बढ़ने का आग्रह किया।

ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी ने कहा कि भारत के पास नाराज़ होने के लिए हर कारण है, और पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी देश को सीमा पार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। रूस ने दोनों पक्षों से संयम बरतने का आह्वान करते हुए यह स्पष्ट किया कि वह सभी प्रकार के आतंकवाद की निंदा करता है और सैन्य वृद्धि को लेकर बहुत चिंतित है।

इजराइल भी भारत के साथ मजबूती से खड़ा है। इसके राजदूत ने कहा कि आतंकवादियों को कोई पनाहगाह नहीं है और उन्होंने भारत के खुद की रक्षा करने के अधिकार का समर्थन किया। भारत ने पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। यह ऑपरेशन सटीक था, जिसमें केवल आतंकी शिविरों को निशाना बनाया गया और पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना नहीं बनाया गया। ऑपरेशन सिंदूर में भारत की कार्रवाई बदला लेने के लिए नहीं बल्कि रक्षा और अपने नागरिकों को सुरक्षित रखने के लिए थी।

वैश्विक नेता जानते हैं कि भारत ने पहले हमला नहीं किया और उसने केवल आतंक का जवाब दिया। ऑपरेशन सिंदूर एक कड़ा संदेश देता है कि भारत आतंकवाद के सामने चुप नहीं बैठेगा और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करेगा, लेकिन हमेशा सावधानी से। दुनिया का समर्थन दिखाता है कि जिम्मेदार देश भारत के आत्मरक्षा के अधिकार को समझते हैं और उसका सम्मान करते हैं। शांति लक्ष्य बना हुआ है लेकिन सुरक्षा के बिना शांति कायम नहीं हो सकती।