National

चाणक्य के अनुसार क्यों जरूरी है भ्रमण?

भ्रमन्सम्पूज्यते राजा भ्रमन्सम्पूज्यते द्विज: |

भ्रमन्सम्पूज्यते योगी स्त्री भ्रमती विनश्यति ||

यहां आचार्य चाणक्य भ्रमण के महत्त्व को प्रतिपादित करते हुए कहते हैं कि भ्रमण करता हुआ राजा पूजा जाता  है , भ्रमण करता हुआ ब्राह्मण पूजा जाता है , भ्रमण करता हुआ योगी पूजा जाता है और भ्रमण करती हुई स्त्री नष्ट हो जाती है |

भाव यह है कि एक स्थान से दूसरे स्थान पर सदा घूमते रहने वाले राजा , विद्वान तथा योगी तो पूजे जाते है , किन्तु ऐसा करने वाली स्त्री नष्ट हो जाती है | भ्रमण करना राजा , विद्वान तथा योगी , इन तीनो को ही शोभा देता है , स्त्री को नहीं |