महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में क्रॉस वोटिंग का खतरा, MVA विधायकों ने फाइव स्टार होटल में गुजारी रात
महाराष्ट्र विधान परिषद के लिए वोटिंग होने वाली है। देर शाम तक विधान परिषद चुनाव के नतीजे भी आ जाएंगे। 11 सीटों पर 12 कैंडिडेट के उतरने से क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है। एमवीए और महायुति अपने समर्थक विधायकों को एकजुट कर रहे हैं। महायुति ने अपने विधायकों को फाइव स्टार होटल में शिफ्ट कर दिया है।
मुंबई : महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव से पहले एमवीए और महायुति गठबंधन के नेता अपने विधायकों को संभालने में जुटे हैं। आंकड़ों के खेल में महायुति हमेशा आगे रही है, मगर क्रॉस वोटिंग का डर बीजेपी-शिवसेना और एनसीपी गठबंधन को सता रहा है। लोकसभा चुनाव के बाद शिंदे गुट के कई विधायकों ने उद्धव ठाकरे के लिए प्रेम जाहिर किया था, उससे महायुति के नेताओं की नींद उड़ी है। पिछली बार विधान परिषद चुनाव में क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस कैंडिडेट चंद्रकांत हंडोरे की हार हुई थी, फिर शिवसेना में बगावत भी हुई और ठाकरे की सरकार गिर गई। गुरुवार को वोटिंग से पहले महायुति ने अपने सभी विधायकों को फाइव स्टार होटल में शिफ्ट कर दिया। शुक्रवार को ये सभी विधायक सीधे विधानसभा पहुंचकर मतदान करेंगे। शिवसेना (यूबीटी) ने भी अपने विधायकों को एक जगह रहने को कहा है।
एनसीपी को भी जीत के लिए एक्स्ट्रा वोट जरूरी
महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव दिलचस्प हो गया है। 11 सीटों पर कुल 12 उम्मीदवार मैदान में हैं। बीजेपी ने पार्टी की राष्ट्रीय सचिव पंकजा मुंडे, पूर्व मंत्री परिणय फुके, पुणे के पूर्व मेयर योगेश तिलेकर समेत पांच कैंडिडेट मैदान में उतारे हैं और उसके पास निर्दलीय समेत 111 विधायकों का समर्थन है। महायुति में शामिल अजित पवार की एनसीपी ने दो और शिंदे की शिवसेना ने दो कैंडिडेट भी चुनाव मैदान में है। अभी 288 सदस्यों वाली विधानसभा में 274 सदस्य हैं। पिछले लोकसभा चुनावों में 7 सदस्य लोकसभा में चुने गए। विधायकों की मौत के बाद चार सीटें भी रिक्त हो गई। एक सदस्य को अयोग्य घोषित किया जा चुका है और 2 विधानसभा सदस्यों के इस्तीफे के कारण कुल 14 सीटें रिक्त हैं। इस लिहाज से एक कैंडिडेट को जीत के लिए 23 वोटों की आवश्यकता होगी। बीजेपी को सभी पांच कैंडिडेट जिताने के लिए 111 के अलावा 4 और वोटों की जरूरत होगी।
38 सदस्यों वाली शिंदे की शिवसेना ने 7 निर्दलीय और प्रहार जनशक्ति पार्टी के दो सदस्यों के सपोर्ट का दावा किया है। इस आंकड़े के हिसाब से शिंदे सेना के पास 47 वोट हैं, जो दो कैंडिडेट को जिताने के लिए काफी है। अजित पवार की एनसीपी के पास 39 विधायक हैं और उसे दो निर्दलीयों का समर्थन भी हासिल है, मगर दोनों कैंडिडेट को जिताने के लिए पांच और वोटों की जरूरत होगी।
क्रॉस वोटिंग हुई तभी होगी एमवीए को तीन कैंडिडेट की जीत
दूसरी ओर महाविकास अघाड़ी ने तीन कैंडिडेट मैदान में उतारे हैं, जबकि उसके पास कुल 60 वोट है। इस हिसाब तीनों कैंडिडेट की जीत के लिए 69 वोटों की जरूरत होगी। 9 विधायकों के क्रॉस वोटिंग किए बगैर तीसरे उम्मीदवार को जीतना नामुमकिन है। विपक्षी एमवीए गठबंधन को उम्मीद है कि वह सत्तारूढ़ गुट के विधायकों की थोड़ी मदद से अपने तीनों उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित कर लेगा। कांग्रेस ने एमएलसी प्रज्ञा सातव को फिर से उम्मीदवार बनाया है, जिसकी जीत तय मानी जा रही है। कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। प्रज्ञा सातव को 23 वोटों की जरूरत होगी। बाकी के 14 वोट शिवसेना (यूबीटी) के उम्मीदवार मिलिंद नार्वेकर के खाते में जाएगा। तीसरे कैंडिडेट किसान और श्रमिक पार्टी (पीडब्ल्यूपी) के एमएलसी जयंत पाटिल को बहुजन विकास अघाड़ी के तीन विधायक , एआईएमआईएम और समाजवादी पार्टी के दो-दो विधायक और सीपीआई (एम) के एक विधायक का समर्थन हासिल है।

