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रोज ‘दस घंटे’ लेट हो रही है मध्य रेलवे की लोकल, दादर से CSMT पहुंचने पर लग रहे 45 मिनट, बढ़ी मुंबई की परेशानी

मुंबई की लाइफ लाइन कही जाने वाली मुंबई लोगों की लाइफ के लिए मुसीबत बनी हुई है। लोकल की लेटलतीफी लोगों को परेशान कर रही है। सीएसएमटी से रोज 75 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनें ऑपरेट होती हैं। 150 लंबी दूरी की ट्रेनों का आवा-गमन होता है। इस चक्कर में लोकल को नजरअंदाज किया जाता है।

मुंबई : पिछले पांच दिनों से दादर और सीएसएमटी के बीच रोजाना ट्रेनों को यात्रा में 40-45 मिनट लग रहे हैं। यात्री इस कदर परेशान हैं कि वे दादर से सीएसएमटी आने के बजाय पश्चिम रेलवे से चर्चगेट पहुंचना बेहतर समझ रहे हैं। यात्रियों की यह परेशानी हाल ही में सीएसएमटी स्टेशन पर यार्ड के काम के बाद शुरू हुई। इस काम के बाद सीएसएमटी स्टेशन पर आने-जाने वाली सभी एक्सप्रेस ट्रेनों को कुल 600 मिनट यानी 10 घंटे ज्यादा वक्त लग रहा है। इसका प्रभाव लोकल ट्रेनों पर भी पड़ रहा है।

ऐसे हो रही है ट्रेनें लेट
सीएसएमटी स्टेशन पर प्लैटफॉर्म 10 से 12 की लंबाई बढ़ाई गई है। इसके अलावा नया रूट रिले इंटरलॉकिंग (आरआरआई) सिस्टम बनाया गया है। इस सिस्टम द्वारा पटरी बदलने और सिग्नल चेंज होने की प्रक्रिया होती है। यह प्रक्रिया क्रॉस ओवर पॉइंट्स और ट्रैक सर्किट की बदौलत पूरी होती है। क्रॉस ओवर पॉइंट पटरी का वह हिस्सा है, जहां से ट्रेन एक ट्रैक से दूसरे ट्रैक पर जाती है। इसी पॉइंट के पास ट्रैक सर्किट भी लगे रहते हैं, जिससे रूट रिले इंटरलॉकिंग को पता चलता है कि ट्रेन गुज़र रही है। ट्रेन गुजरने के बाद सिग्नल येलो, रेड या ग्रीन होता है। पहले एक ट्रैक सर्किट से ट्रेन गुजर जाने के बाद उसके पीछे दूसरी ट्रेन उसी क्रॉस ओवर पॉइंट से गुजरने के लिए तैयार हो जाती थी। नया सिस्टम लगने के बाद अब दो क्रॉस ओवर पॉइंट से ट्रेन के गुज़रने तक दूसरी ट्रेन को इंतज़ार करना पड़ता है।

कैसे बढ़ गया दस घंटे का टाइम
सीएसएमटी से रोजाना 75 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनें ऑपरेट होती हैं। इसका मतलब है कि 150 लंबी दूरी की ट्रेनों का आना-जाना होता है। एक ट्रेन जब प्लैटफॉर्म पर पहुंचती है, तब उस रेक को यार्ड तक पहुंचाने, ट्रेन का लोको हटाने और ट्रैक को क्लीयर करने के लिए चार चक्कर लगते हैं। जितनी बार ये चक्कर लगेंगे, उतनी बार क्रॉस ओवर पॉइंट से गुजरना पड़ेगा। सीएसएमटी के लिए इस प्रक्रिया का दायरा मस्जिद बंदर स्टेशन तक होता है। सीएसएमटी स्टेशन पर 150 X 4 यानी कुल 600 बार यह प्रक्रिया दोहराई जा रही है और यदि इस मूवमेंट के लिए 1 मिनट का समय भी लगा, तो दिनभर में कुल 10 घंटे जितना समय इसमें ख़र्च हो रहा है।