चाणक्य नीति:- समय की सूझ
उपसग्रेन्यचक्रे च दुर्भिक्षे च भयावहे |
असाधुजनसंपर्के पलायती स जीवति ||
आचार्य चाणक्य यहां समय की सूझ की चर्चा करते हुए कहते हैं – उपद्रव या लड़ाई हो जाने पर, भयंकर अकाल पड़ जाने पर और दुष्टों का साथ मिलने पर भागजाने वाला व्यक्ति ही जीता है |
आशय यह है कि कहीं पर भी अन्य लोगों के बीच में लडाई – झगड़ा, दंगा फसाद हो जाने पर, भयंकर अकाल पड़ जाने पर और दुष्ट लोगों के संपर्क में आ जाने पर उस स्थान को छोड़कर भाग खड़ा होने वाला व्यक्ति अपने को बचा लेता है | ऐसी जगहों से भाग जाना ही सबसे बड़ी समझदारी है |

