Indian Railway: अब पटरियों पर कचरा फेंकना होगा मुश्किल, सेंट्रल रेलवे ने उठाया बड़ा कदम
Central Railway News Today: मॉनसून के दौरान पटरियों के किनारे जमा कचरा रेलवे की मुसीबत बन जाता है। यदि थोड़ा कचरा भी नालों में अटक जाए, तो पटरियों पर पानी जमा हो जाएगा और ट्रेनों का परिचालन प्रभावित होगा। इस बार मध्य रेलवे कचरे को रोकने के लिए पर्मानेंट इलाज करने के मूड में है।
मुंबई: मॉनसून के दौरान पटरियों के किनारे जमा कचरा रेलवे की मुसीबत बन जाता है। यदि थोड़ा कचरा भी नालों में अटक जाए, तो पटरियों पर पानी जमा हो जाएगा और ट्रेनों का परिचालन प्रभावित होगा। इस तकलीफ से बचने के लिए रेलवे दर्जनों उपाय करती है, लेकिन इस बार मध्य रेलवे बाहर से फेंके जाने वाले कचरे को रोकने के लिए पर्मानेंट इलाज करने के मूड में है। मध्य रेलवे सीएसएमटी से कल्याण तक मौजूदा दीवार के ऊपर एक और प्रोटेक्शन लगाने जा रही है जिससे रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले लोग पटरियों पर कचरा नहीं फेंक पाएंगे।
विक्रोली में हुआ ट्रायल
कचरा रोकने के लिए प्रोटेक्शन लगाने का ट्रायल विक्रोली स्टेशन के पास हुआ है। इस प्रयोग के बेहतर परिणाम मिलने के बाद मध्य रेलवे प्रशासन ने टफन्ड मॉल्डिंग कंपोसाइट (TMC) को पूरे रूट पर लगाने का फैसला लिया। बताया जा रहा है कि लोहे के पतरों या स्टील फेंसिंग की तुलना में ये TMC टिकाऊ और किफायती है। रेलवे ने बताया कि विक्रोली के पास 6ठी लाइन के नजदीक करीब रेलवे की सुरक्षा दीवार के ऊपर पांच मीटर की फेंसिंग लगाई गई है। ये फेंसिंग 100 मीटर तक लगाई है।
मेनलाइन पर होगी फेंसिंग
अब रेलवे सीएसएमटी से कल्याण तक करीब 60 किमी रूट पर TMC फेंसिंग लगाएगी। ये काम अगले 6 महीने में पूरा हो जाएगा। सूत्रों के अनुसार मॉनसून से पहले कुछ चिन्हित जगहों पर प्रोटेक्शन का काम प्राथमिकता से होगा। इनमें मस्जिद, सैंडहस्ट रोड, करी रोड, सायन, कुर्ला और भांडुप का नाम शामिल है। रेलवे प्रशासन के अनुसार यहां पटरियों पर कचरा फेंकने की समस्या काफी पुरानी है। कई बार एक्शन लेने के बावजूद कचरा फेंकना जारी है। मध्य रेलवे द्वारा 2.72 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। एक अधिकारी ने बताया कि इस फेंसिंग की रीसेल वैल्यू न के बराबर है इसलिए चोरी होने का भी कोई खतरा नहीं है।
पिछले साल 80 हजार मेट्रिक टन कचरा
अभी रेलवे ने पटरियों के दोनों ओर दीवार बनाई हुई है। यहां दीवार नहीं है, वहां स्टील के पतरों की फेंसिंग है। 2023 में रेलवे ने प्री-मॉनसून की तैयारी में पटरियों से करीब 80 हजार मेट्रिक टन कचरा उठाया था। इस साल प्री-मॉनसून का काम जल्द ही शुरू होने वाला है। मध्य रेलवे ने कचरा उठाने के लिए पुरानी लोकल ट्रेनों को कन्वर्ट किया है जिन्हें अब स्वच्छता रथ का नाम दिया गया है। 6 डिब्बों की इस ट्रेन में करीब 60 टन कचरा प्रति कोच समाहित हो सकता है। हालांकि, कचरा रीसाइकिलिंग प्लांट पर 250 किलो प्रति दिन कचरा रीसाइकिल करने की क्षमता है

