शिवसेना विधायक अयोग्य घोषित परिणाम: शिवसेना के विधायकों की अयोग्यता संबंधी याचिका पर आज शाम 4 बजे विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को फैसला सुनाना है।
मुंबई: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत शिवसेना के 16 विधायकों के खिलाफ अपात्रता मामले में विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर आज महत्वपूर्ण फैसला सुनाने वाले हैं। इस नतीजे पर एकनाथ शिंदे समेत उनके साथी विधायकों और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) विधायकों की किस्मत निर्भर करेगी। इस नतीजे से पहले मंगलवार का दिन भी सियासी घटनाक्रम का दिन बन गया। फैसले से पहले नार्वेकर और शिंदे की मुलाकात पर विपक्षी दलों ने नाराजगी जताई है और विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।
उधर, फैसले से पहले ही उप मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष का फैसला चाहे जो भी हो, उसका सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा और सरकार नहीं गिरेगी। फडणवीस ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष उचित और कानूनी रूप से न्यायसंगत फैसला करेंगे। हमारी सरकार कानूनी तौर पर मजबूत है। हमें उम्मीद है कि विधानसभा अध्यक्ष से हमें न्याय मिलेगा… हमारी सरकार कल भी स्थिर थी और कल भी स्थिर रहेगी।
क्या हो सकता है स्पीकर के फैसले के बाद
पहली संभवना
फैसला अगर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट के पक्ष में आया, तो उद्धव ठाकरे गुट के 14 विधायक विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य करार दिए जा सकते हैं।
अगर ऐसा हुआ तो……
1- ठाकरे गुट विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर सकता है।
2- ठाकरे गुट को चुनाव से पहले राज्य भर में सहानुभूति मिलने की संभावना है, इसका फायदा चुनाव में मिल सकता है।
दूसरी संभावना
अगर फैसला उद्धव ठाकरे गुट के पक्ष में आया, तो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उनके तीन मंत्रियों समेत 16 विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द हो जाएगी।
अगर ऐसा हुआ तो…
1- एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ेगा और सरकार गिर जाएगी। ऐसी स्थिति में राज्यपाल से पास किसी को नए सिरे से बहुमत का दावा करना पड़ेगा यदि दावा नहीं किया तो राष्ट्रपति शासन का विकल्प है।
2- शिंदे गुट के हाथ से धनुष-बाण चुनाव चिह्न जा सकता है, इसका खामियाजा उसे चुनाव में भुगतना पड़ेगा। विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ शिंदे गुट सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है।
क्या है मामला
जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के 40 विधायकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत कर दी थी जिससे शिवसेना में विभाजन हो गया और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी सरकार गिर गई थी। बाद में शिंदे ने बीजेपी के समर्थन से सरकार बना ली थी और खुद मुख्यमंत्री बन गए थे। इसके बाद शिंदे और ठाकरे गुटों द्वारा दल-बदल रोधी कानूनों के तहत एक-दूसरे के विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की गई थीं। ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला लेने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को कहा था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाने की समय-सीमा 31 दिसंबर, 2023 तय की थी, लेकिन बाद में स्पीकर के आग्रह पर अवधि को बढ़ाकर 10 जनवरी कर दिया था। चुनाव आयोग ने शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न दे दिया था।

