गोल मार्केट को म्यूजियम बनाने का मार्ग प्रशस्त, NDMC ने कार्य शुरू करने के प्रस्ताव को दी स्वीकृति
लुटियन की गोल मार्केट को म्यूजियम में तब्दील करने का रास्ता साफ हो गया है। एनडीएमसी की बैठक बुधवार को गोल मार्केट को म्यूजियम बनाने के लिए कार्य शुरू करने के प्रस्ताव का हरी झंडी दे दी है। इस तरह दिल्ली की मशहूर और ऐतिहासिक गोल मार्केट नए अवतार में नजर आएगी। वह गोल मार्केट को म्यूजियम बनाने की योजना को गत 28 जून को पास कर चुकी है, लेकिन इस योजना के तहत कार्य शुरू करने के आदेश नहीं हुए थे। इस योजना पर करीब 22 करोड़ रुपये व्यय होंगे।
एमसीडी के अनुसार गोल मार्केट को म्यूजियम बनाने के दौरान उसके पुराने स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। इसके अलावा गोल मार्केट के आसपास के इलाकों को भी विकसित किया जाएगा। इस तरह गोल मार्केट के पुनर्विकास के बाद भी यह एतिहासिक विरासत व इलाका पहले की तरह नजर आएगा। मार्केट का पुनर्विकास करने संबंधी परियोजना डेढ़ दशक से भी ज्यादा समय से लंबित थी। यह परियोजना वर्ष 2006 शुरू होनी थी और कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले इसे पूरा करना था, लेकिन विभिन्न कारणों से परियोजना शुरू नहीं हो सकी।
एनडीएमसी के अनुसार, म्यूजियम का पूरा हिस्सा पूरी तरह से वातानुकूलित, फूड कोर्ट और सब-वे के साथ विश्वस्तरीय सेवाएं होगी। इसके अलावा गोल मार्केट के आसपास के इलाके को भी विकसित करने के दौरान यहां पर पैदल चलने वालों की सुरक्षा के साथ-साथ सड़क यातायात को कम करने के लिए आरके आश्रम मार्ग से मुख्य गोल मार्केट के बीच एक सब-वे बनाया जाएगा। इसके अलावा यहां पार्किंग भी बनाई जाएगी। वहीं म्यूजियम के मुख्य भवन में शीशे से गुंबद जैसी संरचना निर्माण, फॉल्स सीलिंग, पहली मंजिल पर इंसुलेटेड छत की संरचना, पूरी तरह से वातानुकूलित सर्विस टनल और लिफ्ट आदि की व्यवस्था होगी।
एक दशक पहले बनाई गई थी गोल मार्केट
अंग्रेज शासकों ने करीब एक सदी पहले भारतीय कर्मचारियों के लिए गोल मार्केट बनाई थी। एडविन लुटियंस के डिजाइन पर इसका निर्माण 1921 में हुआ था। इसमें 28 दुकानें थीं। उस समय इसमें अंग्रेजों के यहां काम करने वाले भारतीय कर्मचारी खरीदारी करते थे। आजादी तक यह ऐसे ही चलती रही, बाद में इसे सबके लिए खोल दिया गया। भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान छोड़ने वाले मशहूर चित्रकार बीसी सान्याल और उनकी पत्नी स्नेहलता दो-तीन मशहूर हस्तियों के साथ गोल मार्केट में पहुंचे थे, लेकिन जर्जर होने के बाद करीब एक दशक पहले इसे बंद कर दिया गया।
उपराज्यपाल के दखल से शुरू हुआ काम
बीते साल जून में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इसमें दिलचस्पी दिखाई। उन्होंने निर्देश दिया कि गोल मार्केट को म्यूजियम बना दिया जाए। इसके बाद एनडीएमसी ने अगस्त में मार्केट को म्यूजियम में बदलने की योजना को मंजूरी दी। इसके लिए 26.74 करोड़ रुपये का प्रावधान था, लेकिन टेंडर होने के दौरान ठेकेदार ने करीब 22 करोड़ में इस योजना को अमलीजामा पहनाने का ठेका ले लिया।
महिला थीम पर बनाने पर चल रहा मंथन
एनडीएममसी ने अभी म्यूजियम का थीम तय नहीं की है, मगर उपराज्यपाल ने इस म्यूजियम को महिला थीम पर बनवाना चाहते है। दरअसल आजादी से पहले बाद में कई महिलाओं ने देश के लिए कार्य किया है। लिहाजा यह म्यूजियम पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी, मदर टेरेसा, अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला, पहली महिला आईपीएस किरण बेदी, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज, मुक्केबाज मैरीकॉम आदि महिलाओं को समर्पित किया जा सकता है।

